जन्म मुहूर्त निर्धारण – सफल जीवन की गारण्टी या कार्मिक दखलंदाज़ी?

जन्म मुहूर्त निर्धारण – सफल जीवन की गारण्टी या कार्मिक दखलंदाज़ी?

जन्म के समय ग्रह-नक्षत्र तय करते है कैसा होगा भाग्य तो क्यों न ग्रह-नक्षत्रों को हम तय कर लें। जब होंगे ग्रह-नक्षत्र अनुकूल तभी हो हमारे बच्चे का जन्म तो जीवन के सुखमय होने की गारण्टी मिल जाए। कुछ ऐसी ही भावना, ऐसी ही कामना लिए माता-पिता जा पहुँचते हैं ज्योतिषी के पास, जानने को…

By डॉ. गुँजारिका राँका September 16, 2017 0

क्योंकि हर ग्रह कुछ कहता हैं…

क्योंकि हर ग्रह कुछ कहता हैं…

पृथ्वी से लाखों करोड़ो मील दूर स्थित ग्रह मेरे जीवन को प्रभावित कर रहे हैं ! कैसे? मैं कितनी भी कड़ी मेहनत करूँ ! मैं अपने कार्य में कितना भी कुशल क्यों न हूँ ! ग्रह निर्धारित करेंगे कि मुझे सफल होना हैं या असफल ??? मेरे रोग ग्रहों की वजह से हैं ! मेरे संबंधों…

By डॉ. गुँजारिका राँका August 16, 2017 0

दुःख के वेश में आया है…सुख !

दुःख के वेश में आया है…सुख !

जो भी हमारे साथ होता है वह हमारे पूर्व कर्मों का फल है। कुदरत का कानून (law of karma) सुनिश्चित करता हैं की हमारा किया हमारें आगे अवश्य आये और नियति बिना चूकें उन लोगों को…. उन परिस्थितियों को हमारे आगे ला के खड़ा कर देती हैं जिनके साथ कुछ पिछला  बकाया हैं और बकाया…

By डॉ. गुँजारिका राँका July 16, 2017 0

भाग्य रचयिता के औज़ार – संस्कार !

भाग्य रचयिता के औज़ार – संस्कार !

हर आत्मा के अपने संस्कार होते हैं- सात्विक, तामसिक, राजसी। सभी आत्माएं / प्रत्येक व्यक्ति अपने इन्ही गुणों के अनुसार व्यवहार करते हैं। ये गुण भी प्रकृति से ही मिलते हैं और प्रकृति ईश्वर की रचना हैं। इसलिए प्रकृति द्वारा दिए गए  संस्कारों का फल हैं उसका व्यवहार ! संस्कार राजसी, तामसिक, सात्विक हो सकते…

By डॉ. गुँजारिका राँका June 16, 2017 0

नियति अटल है पर भाग्य रचयिता है हम !

नियति अटल है पर भाग्य रचयिता है हम !

परिस्थितियां अटल है और फिर भी भाग्य रचयिता मैं हूँ ! कैसे? आइये इसे एक साधारण समीकरण से समझते हैं। भाग्य =  नियति  + वर्तमान कर्म  ‘नियति’ यानि वे परिस्थितियां जो हमारे सामने हमारी इच्छा अनिच्छा के बिना आती हैं। ‘वर्तमान कर्म’ यानि उन परिस्थितियों के आने पर जो “जो हम करते हैं, कहते हैं…

By डॉ. गुँजारिका राँका May 16, 2017 0